Wisdom

The Half-Learned Man

शहर से बड़ी डिग्री लेकर लौटा एक नौजवान कस्बे में सबको अनपढ़ समझता है और पिता की पुरानी जिल्दसाज़ी की दुकान बेचने पर तुला है; दुकान का बूढ़ा कारीगर हर फटी किताब जोड़ते हुए उसे भर्तृहरि का एक-एक श्लोक सुनाता है, जिसमें पहला यही है कि मूर्ख को समझाया जा सकता है, पर आधे ज्ञानी को तो ब्रह्मा भी नहीं।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

शहर से बड़ी डिग्री लेकर लौटा एक नौजवान कस्बे में सबको अनपढ़ समझता है और पिता की पुरानी जिल्दसाज़ी की दुकान बेचने पर तुला है; दुकान का बूढ़ा कारीगर हर फटी किताब जोड़ते हुए उसे भर्तृहरि का एक-एक श्लोक सुनाता है, जिसमें पहला यही है कि मूर्ख को समझाया जा सकता है, पर आधे ज्ञानी को तो ब्रह्मा भी नहीं।

Tradition & source notes

भर्तृहरि का नीतिशतक ('अज्ञः सुखमाराध्यः… ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्मापि तं नरं न रञ्जयति', 'केयूराणि न भूषयन्ति पुरुषं', 'येषां न विद्या न तपो न दानम्'); फ़्रेम कथा काल्पनिक

Back to stories
HomeDiya SevaPujasStoriesMy bookings