Bhagavad Gita

Eight Steps Down

सड़क के एक झगड़े में एक नौजवान ने हाथ उठा दिया और सामने वाला अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ रहा है; थाने की उस लंबी रात में बूढ़ा हवलदार उसे गीता की वह सीढ़ी दिखाता है जो हाथ उठने से बहुत पहले एक छोटे-से विचार से उतरनी शुरू हुई थी: ध्यान, लगाव, चाह, क्रोध, मोह, भूल, बुद्धि का नाश और फिर विनाश।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

सड़क के एक झगड़े में एक नौजवान ने हाथ उठा दिया और सामने वाला अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ रहा है; थाने की उस लंबी रात में बूढ़ा हवलदार उसे गीता की वह सीढ़ी दिखाता है जो हाथ उठने से बहुत पहले एक छोटे-से विचार से उतरनी शुरू हुई थी: ध्यान, लगाव, चाह, क्रोध, मोह, भूल, बुद्धि का नाश और फिर विनाश।

Tradition & source notes

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2 (56–72, विशेषकर 62–63: ध्यायतो विषयान्पुंसः… क्रोधाद्भवति सम्मोहः), अध्याय 3 (36–43: काम ही शत्रु), अध्याय 16 (21: काम, क्रोध, लोभ, नरक के तीन द्वार); फ़्रेम कथा काल्पनिक

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