The Fruit of Immortality
उज्जैन के राजा भर्तृहरि को एक ब्राह्मण अमरता देने वाला फल भेंट करता है; राजा प्रेम में उसे रानी पिंगला को देता है, और कुछ दिन बाद वही फल हाथों-हाथ घूमकर दरबार में फिर राजा के सामने रखा जाता है, और उसी पल एक राजा के भीतर कुछ टूटता है और एक कवि-संन्यासी जन्म लेता है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
उज्जैन के राजा भर्तृहरि को एक ब्राह्मण अमरता देने वाला फल भेंट करता है; राजा प्रेम में उसे रानी पिंगला को देता है, और कुछ दिन बाद वही फल हाथों-हाथ घूमकर दरबार में फिर राजा के सामने रखा जाता है, और उसी पल एक राजा के भीतर कुछ टूटता है और एक कवि-संन्यासी जन्म लेता है।
Tradition & source notes
राजा भर्तृहरि की कथा, उज्जैन की लोक और नाथ परंपरा (लोक-परंपरा); भर्तृहरि के नीतिशतक का श्लोक 'यां चिन्तयामि सततं मयि सा विरक्ता' परंपरा से इसी प्रसंग से जोड़ा जाता है