ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Vedas & Upanishads

The Evening of the Division

एक रिटायर्ड पोस्टमास्टर पुश्तैनी घर दोनों बेटों में बाँटकर पहाड़ जाने का ऐलान करता है, और उसी शाम पत्नी धीरे से पूछती है कि क्या यह घर मुझे मौत के डर से छुड़ा देगा; यह प्रश्न उसे वहीं ले जाता है जहाँ याज्ञवल्क्य संन्यास से पहले संपत्ति बाँट रहे थे और मैत्रेयी ने कहा था, 'जिससे मैं अमर न हो सकूँ, उसे लेकर क्या करूँ?'

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

एक रिटायर्ड पोस्टमास्टर पुश्तैनी घर दोनों बेटों में बाँटकर पहाड़ जाने का ऐलान करता है, और उसी शाम पत्नी धीरे से पूछती है कि क्या यह घर मुझे मौत के डर से छुड़ा देगा; यह प्रश्न उसे वहीं ले जाता है जहाँ याज्ञवल्क्य संन्यास से पहले संपत्ति बाँट रहे थे और मैत्रेयी ने कहा था, 'जिससे मैं अमर न हो सकूँ, उसे लेकर क्या करूँ?'

Tradition & source notes

बृहदारण्यक उपनिषद, अध्याय 2.4 और 4.5 (याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद); फ़्रेम कथा काल्पनिक

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