ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Mahabharata traditions

Bheem and the Demon Baka

इस नगर में हर घर की बारी आती है — राक्षस का भोजन बनने की। कल ब्राह्मण की बारी है।

Original Hindi textDetailed story synopsis

लाक्षागृह की आग से बचकर पांडव माँ कुंती के साथ एकचक्रा नगरी में एक गरीब ब्राह्मण के घर छिपे हैं। दिन भर भिक्षा माँगते हैं, और आधा भोजन भीम खाते हैं। एक दिन घर के भीतर से रोने की आवाज़ आती है। कुंती दीवार के पास जाकर सुनती हैं — ब्राह्मण, उसकी पत्नी, बेटी, सब कह रहे हैं कि कल मैं जाऊँगा। नगर के बाहर बकासुर रहता है, और हर घर को बारी-बारी से गाड़ी भर अन्न, दो भैंसे और एक आदमी भेजना पड़ता है। कल इस घर की बारी है। नन्हा बेटा एक तिनका उठाकर कहता है — मैं इससे राक्षस को मार दूँगा। कुंती भीतर जाती हैं — मेरे पाँच बेटे हैं, एक चला जाएगा। ब्राह्मण मना करता है — मेहमान को मौत के मुँह में नहीं भेजूँगा। युधिष्ठिर माँ पर नाराज़ होते हैं, पर कुंती का विश्वास अडिग है। भीम गाड़ी लेकर जंगल पहुँचते हैं, और राक्षस के सामने बैठकर उसी का भोजन खाने लगते हैं। लड़ाई होती है, भीम बक की कमर तोड़ देते हैं। उसके साथी वचन देते हैं कि अब कभी नगर को नहीं सताएँगे। सुबह नगर द्वार पर राक्षस का शरीर पड़ा मिलता है, और पांडव चुपचाप फिर से गुमनाम हो जाते हैं।

A moment of reflection

यह कहानी ताकत की नहीं, उस माँ की है जिसने समझा कि जिस घर ने आसरा दिया, उसका दुख अपना दुख है। कुंती के लिए धर्म का मतलब था — जो बचा सकता है, वह पीछे न हटे। आज भी हम अक्सर सोचते हैं कि यह मेरी समस्या नहीं है। यह कथा बच्चों को सिखाती है कि बल भगवान की देन है, दूसरों की रक्षा के लिए। और बड़ों को याद दिलाती है कि एक गरीब परिवार की बेटी और नन्हे बेटे में भी कितना साहस छिपा होता है। भीम की हँसी और भूख इस कथा को घर भर के लिए मज़ेदार भी बनाती है।

Tradition & source notes

महाभारत, आदि पर्व (बकवध पर्व)

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