ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Shiva & Shakti

Uninvited

दक्ष के महायज्ञ के द्वार पर सती अकेली खड़ी हैं, जहाँ हर देवता का आसन है पर शिव का नहीं; साथ आए नंदी की आँखों से हम देखते हैं कि एक पिता का अहंकार कैसे बेटी को अग्नि तक, शिव को तांडव तक और ख़ुद दक्ष को बकरे के सिर तक ले जाता है।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

दक्ष के महायज्ञ के द्वार पर सती अकेली खड़ी हैं, जहाँ हर देवता का आसन है पर शिव का नहीं; साथ आए नंदी की आँखों से हम देखते हैं कि एक पिता का अहंकार कैसे बेटी को अग्नि तक, शिव को तांडव तक और ख़ुद दक्ष को बकरे के सिर तक ले जाता है।

Tradition & source notes

शिव पुराण, रुद्र संहिता, सती खंड; भागवत पुराण, स्कंध 4, अध्याय 2–7

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