A Lamp Where No Wind Blows
महीनों से सो न पाया एक नौजवान आधी रात ऋषिकेश के घाट पर आ बैठता है, जहाँ दीये बेचने वाली एक बूढ़ी अम्मा तेज़ हवा में भी अपना दीया जलाए रखती है, और वही अम्मा उसे अर्जुन का वह सवाल सुनाती है जो आज हर किसी का है: यह मन तो हवा से भी चंचल है, इसे बाँधूँ कैसे?
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
महीनों से सो न पाया एक नौजवान आधी रात ऋषिकेश के घाट पर आ बैठता है, जहाँ दीये बेचने वाली एक बूढ़ी अम्मा तेज़ हवा में भी अपना दीया जलाए रखती है, और वही अम्मा उसे अर्जुन का वह सवाल सुनाती है जो आज हर किसी का है: यह मन तो हवा से भी चंचल है, इसे बाँधूँ कैसे?
Tradition & source notes
श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 6, ध्यानयोग (5–6: उद्धरेदात्मनात्मानम्; 19: यथा दीपो निवातस्थो; 34–35: चञ्चलं हि मनः कृष्ण… अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते), अध्याय 2 (67); फ़्रेम कथा काल्पनिक
