Three Thousand Years Without a Book
गर्मी की छुट्टियों में बनारस के दादा की वेद-पाठशाला भेजा गया एक चिढ़ा हुआ किशोर पहले ही दिन पूछता है कि जिस किताब को कभी लिखा ही नहीं गया वह हज़ारों साल बची कैसे, और दादा उसे सुबह के घन-पाठ, सामगान के सुरों, यजुर्वेद के यज्ञ और अथर्ववेद की 'धरती मेरी माँ है' वाली प्रार्थना के बीच से चारों वेदों की असली कहानी सुनाते हैं।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
गर्मी की छुट्टियों में बनारस के दादा की वेद-पाठशाला भेजा गया एक चिढ़ा हुआ किशोर पहले ही दिन पूछता है कि जिस किताब को कभी लिखा ही नहीं गया वह हज़ारों साल बची कैसे, और दादा उसे सुबह के घन-पाठ, सामगान के सुरों, यजुर्वेद के यज्ञ और अथर्ववेद की 'धरती मेरी माँ है' वाली प्रार्थना के बीच से चारों वेदों की असली कहानी सुनाते हैं।
Tradition & source notes
चारों वेदों (ऋग्, यजुर्, साम, अथर्व) का परिचय; वेदव्यास द्वारा वेद-विभाजन (विष्णु पुराण 3.4); याज्ञवल्क्य-वैशम्पायन और तैत्तिरीय शाखा की कथा (विष्णु पुराण 3.5, पौराणिक परंपरा); अथर्ववेद भूमि सूक्त (12.1); पाठ-परंपरा (संहिता, पद, घन पाठ); फ़्रेम कथा काल्पनिक
