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Mahabharata traditions

The Old Monkey's Tail

जो भीम पेड़ उखाड़ता हुआ चलता था, वह रास्ते में लेटे एक बूढ़े बंदर की पूँछ तक न हिला सका।

Original Hindi textDetailed story synopsis

वनवास के दिनों में पांडव बदरिकाश्रम के पास ठहरे थे। एक सुबह हवा उड़ाकर एक हज़ार पंखुड़ियों वाला सुगंधित कमल — सौगंधिक — द्रौपदी के पास ले आई। द्रौपदी ने भीम से ऐसे और फूल लाने को कहा। अपने बल पर इतराते भीम गंधमादन पर्वत की ओर गरजते हुए चल पड़े — पेड़ उखाड़ते, हाथियों को भगाते, पूरे जंगल को थर्राते। केले के एक वन में रास्ते के बीचोंबीच एक बूढ़ा बंदर लेटा था। बंदर बोला — बेटा, बीमार हूँ; मेरी पूँछ सरकाकर निकल जाओ। भीम ने एक हाथ से पूँछ उठानी चाही, फिर दोनों हाथों से, पूरी ताकत लगा दी — पर पूँछ टस से मस न हुई। लज्जित भीम ने हाथ जोड़कर पूछा — आप कौन हैं? बंदर मुस्कुराया — मैं हनुमान हूँ, पवनदेव का बेटा, तुम्हारा बड़ा भाई। हनुमान ने रामकथा सुनाई, समुद्र लाँघने वाला विराट रूप दिखाया, और चारों युगों का धर्म समझाया। फिर वचन दिया कि युद्ध में वे अर्जुन के रथ की ध्वजा पर बैठकर गरजेंगे। उनके बताए रास्ते से भीम कुबेर के सरोवर पहुँचे, रखवालों से लड़े, और आखिर द्रौपदी के लिए सौगंधिक कमल लेकर लौटे — इस बार बल के साथ विनय भी लेकर।

A moment of reflection

भीम की ताकत में कोई कमी नहीं थी — कमी बस इस समझ की थी कि ताकत किसके लिए है। हनुमान ने उन्हें हराया नहीं, एक पूँछ से उनका घमंड उतारा, और फिर गले लगा लिया। यही सच्चे बड़े की पहचान है — छोटे को छोटा महसूस कराए बिना उसे सही रास्ता दिखाना। आज जब घरों में हर कोई अपनी काबिलियत साबित करने की दौड़ में है, यह कथा याद दिलाती है कि बल, पद और धन तभी शोभा देते हैं जब उनके साथ विनय हो। बच्चों को यह कहानी हँसाएगी, और बड़ों को चुपचाप सोचने पर मजबूर करेगी।

Tradition & source notes

महाभारत — वन पर्व (तीर्थयात्रा पर्व, भीम-हनुमान संवाद, अध्याय 146–153)

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