Four Hundred Thin Cows
गुरु गौतम के आश्रम में बालक सत्यकाम से उसका गोत्र पूछा जाता है और वह माँ जबाला की कही बात ज्यों की त्यों दोहरा देता है कि उसे अपने पिता का नाम नहीं पता; गुरु उसी सच के कारण उसे अपनाते हैं और चार सौ दुबली गायें देकर जंगल भेज देते हैं, जहाँ बरसों बाद एक बैल, आग, हंस और जलपक्षी उसे वह सिखाते हैं जो किसी आश्रम में नहीं मिला।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
गुरु गौतम के आश्रम में बालक सत्यकाम से उसका गोत्र पूछा जाता है और वह माँ जबाला की कही बात ज्यों की त्यों दोहरा देता है कि उसे अपने पिता का नाम नहीं पता; गुरु उसी सच के कारण उसे अपनाते हैं और चार सौ दुबली गायें देकर जंगल भेज देते हैं, जहाँ बरसों बाद एक बैल, आग, हंस और जलपक्षी उसे वह सिखाते हैं जो किसी आश्रम में नहीं मिला।
Tradition & source notes
छान्दोग्य उपनिषद, अध्याय 4, खंड 4–9 (सत्यकाम जाबाल), आगे खंड 10–15 (शिष्य उपकोसल)
