ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Shiva & Shakti

The Blessing of Chhathi Maiya

राजा की गोद में मरा हुआ बेटा था, और वह ख़ुद मरने चला था — तभी आसमान से रोशनी उतरी।

Original Hindi textDetailed story synopsis

स्वायंभुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत धर्मात्मा हैं, पर संतान नहीं है। रानी मालिनी के साथ वे बरसों प्रतीक्षा करते हैं। आख़िर महर्षि कश्यप पुत्र-प्राप्ति का यज्ञ करवाते हैं और रानी को यज्ञ की खीर देते हैं। रानी गर्भवती होती हैं, महल में उत्सव है। पर जिस दिन बेटा जन्म लेता है, वह साँस नहीं लेता — सुंदर, पूरा, पर निर्जीव। महल में मातम छा जाता है। राजा बेटे को सीने से लगाए श्मशान जाते हैं, और वहाँ तय करते हैं कि अब वे भी जीवित नहीं रहेंगे। वे अपने प्राण त्यागने ही वाले हैं कि आकाश से एक दिव्य विमान उतरता है। उसमें एक देवी हैं — ब्रह्मा की मानस पुत्री, देवसेना, जो सृष्टि के छठे अंश से जन्मी हैं और षष्ठी कहलाती हैं। वे बच्चों की रक्षा करती हैं। देवी शिशु को उठाती हैं, और बच्चा रो पड़ता है — जीवित। देवी कहती हैं कि वे चाहें तो बच्चे को ले जा सकती हैं, पर वे राजा को एक काम सौंपती हैं: मेरी पूजा धरती पर फैलाओ। राजा वचन देते हैं। बेटा लौटता है, और राजा प्रियव्रत पूरे राज्य में षष्ठी देवी की पूजा शुरू करवाते हैं। वही माँ आज छठी मैया हैं।

A moment of reflection

छठ के घाट पर खड़ी हर माँ जो माँगती है, वह इसी कथा में है — बच्चे की लंबी उम्र और सुख। राजा प्रियव्रत के पास सब कुछ था, पर बेटे को खोकर उन्हें लगा कि जीने का अर्थ चला गया। यह कथा उस दर्द को छूती है जिसे बहुत से परिवार चुपचाप सहते हैं। षष्ठी देवी बच्चों की रक्षक माँ हैं, और उनका वरदान बताता है कि जब इंसान हार मान ले, तब भी माँ की कृपा का दरवाज़ा खुला रहता है। छठ के कठिन व्रत में जो श्रद्धा दिखती है, उसकी जड़ यही भरोसा है।

Tradition & source notes

ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड (षष्ठी देवी और राजा प्रियव्रत की कथा)

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