Wisdom

Wealth That Lasts Ten Years

इंदौर के पुराने कपड़ा बाज़ार में एक नौजवान ने जल्दी अमीर बनने के चक्कर में दादा की दुकान गिरवी रख दी है; बूढ़े दादा उसे चाणक्य का श्लोक सुनाते हैं कि ग़लत तरीके से कमाया धन दस साल टिकता है और ग्यारहवें साल जड़ समेत जाता है, और पोता गिनने लगता है कि सामने वाले सेठ की चमकती हवेली का यह कौन-सा साल है।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

इंदौर के पुराने कपड़ा बाज़ार में एक नौजवान ने जल्दी अमीर बनने के चक्कर में दादा की दुकान गिरवी रख दी है; बूढ़े दादा उसे चाणक्य का श्लोक सुनाते हैं कि ग़लत तरीके से कमाया धन दस साल टिकता है और ग्यारहवें साल जड़ समेत जाता है, और पोता गिनने लगता है कि सामने वाले सेठ की चमकती हवेली का यह कौन-सा साल है।

Tradition & source notes

चाणक्य नीति (धन, बचत, कर्ज़ और लोभ पर श्लोक, जैसे 'अन्यायोपार्जितं वित्तं दशवर्षाणि तिष्ठति', अध्याय 15; 'आपदर्थे धनं रक्षेत्', अध्याय 1); फ़्रेम कथा काल्पनिक

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