ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Ramayana

The Enemy's Brother

भरी सभा में अपमानित होकर निकले विभीषण चार साथियों के साथ समुद्र पार राम के शिविर के ऊपर आ ठहरते हैं, और नीचे सुग्रीव धनुष ताने कहते हैं कि यह जासूस है, इसे मार दो; फ़ैसला अब राम के हाथ में है।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

भरी सभा में अपमानित होकर निकले विभीषण चार साथियों के साथ समुद्र पार राम के शिविर के ऊपर आ ठहरते हैं, और नीचे सुग्रीव धनुष ताने कहते हैं कि यह जासूस है, इसे मार दो; फ़ैसला अब राम के हाथ में है।

Tradition & source notes

वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड (सर्ग 9–19, विभीषण-शरणागति); रामचरितमानस, सुंदरकांड (रावण का विभीषण को लात मारना मानस का प्रसंग है, वाल्मीकि में विभीषण कठोर वचनों से अपमानित होकर निकलते हैं)

Back to stories
HomeDiya SevaPujasStoriesMy bookings