One Hundred and One Years
देवों का राजा इंद्र और असुरों का राजा विरोचन, दो कट्टर शत्रु, एक ही दिन समिधा लेकर प्रजापति के द्वार पहुँचते हैं; बत्तीस बरस की सेवा के बाद पानी के बर्तन में अपनी परछाई देखकर मिले उत्तर से विरोचन संतुष्ट लौट जाता है, पर इंद्र रास्ते में ही रुक जाता है क्योंकि कुछ खटकता है, और यही खटका उसे कुल एक सौ एक बरस तक बार-बार लौटाता है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
देवों का राजा इंद्र और असुरों का राजा विरोचन, दो कट्टर शत्रु, एक ही दिन समिधा लेकर प्रजापति के द्वार पहुँचते हैं; बत्तीस बरस की सेवा के बाद पानी के बर्तन में अपनी परछाई देखकर मिले उत्तर से विरोचन संतुष्ट लौट जाता है, पर इंद्र रास्ते में ही रुक जाता है क्योंकि कुछ खटकता है, और यही खटका उसे कुल एक सौ एक बरस तक बार-बार लौटाता है।
Tradition & source notes
छान्दोग्य उपनिषद, अध्याय 8, खंड 7–12 (प्रजापति से इंद्र और विरोचन की आत्म-शिक्षा)