One Vow, A Hundred Years
गंगा किनारे मछुआरों के मुखिया के सामने युवराज देवव्रत पिता की ख़ुशी के लिए राजगद्दी और ब्याह दोनों त्याग देता है, आकाश से फूल बरसते हैं और 'भीष्म' नाम मिलता है, पर यही सौगंध अगले सौ बरस उसे हस्तिनापुर के सिंहासन से बाँधे रखती है, तब भी जब वह सिंहासन ग़लत रास्ते पर था।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
गंगा किनारे मछुआरों के मुखिया के सामने युवराज देवव्रत पिता की ख़ुशी के लिए राजगद्दी और ब्याह दोनों त्याग देता है, आकाश से फूल बरसते हैं और 'भीष्म' नाम मिलता है, पर यही सौगंध अगले सौ बरस उसे हस्तिनापुर के सिंहासन से बाँधे रखती है, तब भी जब वह सिंहासन ग़लत रास्ते पर था।
Tradition & source notes
महाभारत, आदि पर्व, संभव पर्व (देवव्रत की प्रतिज्ञा, सत्यवती-शांतनु विवाह); भीष्म पर्व के प्रसंग
