Fly Away With the Net
चावल के दानों के लालच में कबूतरों का पूरा झुंड शिकारी के जाल में फँस जाता है, शिकारी लाठी लिए दौड़ रहा है, और कबूतर-राज चित्रग्रीव एक ही बात कहता है: सब एक साथ उड़ो, जाल समेत; यहीं से एक चूहे, एक कौवे, एक कछुए और एक हिरण की अनोखी दोस्ती शुरू होती है, जो आगे हर जाल में एक-दूसरे की ढाल बनती है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
चावल के दानों के लालच में कबूतरों का पूरा झुंड शिकारी के जाल में फँस जाता है, शिकारी लाठी लिए दौड़ रहा है, और कबूतर-राज चित्रग्रीव एक ही बात कहता है: सब एक साथ उड़ो, जाल समेत; यहीं से एक चूहे, एक कौवे, एक कछुए और एक हिरण की अनोखी दोस्ती शुरू होती है, जो आगे हर जाल में एक-दूसरे की ढाल बनती है।
Tradition & source notes
नारायण पंडित का हितोपदेश, प्रथम भाग 'मित्रलाभ' (कबूतर-राज चित्रग्रीव, चूहा हिरण्यक, कौवा लघुपतनक, कछुआ मंथरक, हिरण चित्रांग); ढाँचा: पाटलिपुत्र के राजा सुदर्शन के पुत्र
