When There Was Nothing
सरकारी अस्पताल के प्रसव-वार्ड के बाहर पहली बार पिता बनने जा रहा एक घबराया युवक पूरी रात बूढ़े वार्ड-सेवक के साथ बिताता है, जो उसे ऋग्वेद के वे सूक्त सुनाता है जो पूछते हैं कि सृष्टि से पहले क्या था और ईमानदारी से मान लेते हैं कि 'शायद वह भी नहीं जानता', और भोर में बच्चे के पहले रोने के साथ वह गायत्री तक पहुँचता है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
सरकारी अस्पताल के प्रसव-वार्ड के बाहर पहली बार पिता बनने जा रहा एक घबराया युवक पूरी रात बूढ़े वार्ड-सेवक के साथ बिताता है, जो उसे ऋग्वेद के वे सूक्त सुनाता है जो पूछते हैं कि सृष्टि से पहले क्या था और ईमानदारी से मान लेते हैं कि 'शायद वह भी नहीं जानता', और भोर में बच्चे के पहले रोने के साथ वह गायत्री तक पहुँचता है।
Tradition & source notes
ऋग्वेद: नासदीय सूक्त (10.129), हिरण्यगर्भ सूक्त (10.121), उषा सूक्त (1.113), अक्ष सूक्त/जुआरी का विलाप (10.34), गायत्री मंत्र (3.62.10); फ़्रेम कथा काल्पनिक
