When Ravana Wept
कुबेर को हराकर लौटते रावण का पुष्पक विमान कैलाश के ऊपर अचानक रुक जाता है, द्वार पर खड़े नंदी को वह बंदर-मुख कहकर हँसता है और नंदी का श्राप हवा में गूँजता है; फिर रावण पूरा पर्वत उठा लेता है, और शिव के एक अँगूठे के दबाव में उसकी भुजाएँ ऐसी दबती हैं कि उसकी चीख से तीनों लोक काँप उठते हैं।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
कुबेर को हराकर लौटते रावण का पुष्पक विमान कैलाश के ऊपर अचानक रुक जाता है, द्वार पर खड़े नंदी को वह बंदर-मुख कहकर हँसता है और नंदी का श्राप हवा में गूँजता है; फिर रावण पूरा पर्वत उठा लेता है, और शिव के एक अँगूठे के दबाव में उसकी भुजाएँ ऐसी दबती हैं कि उसकी चीख से तीनों लोक काँप उठते हैं।
Tradition & source notes
वाल्मीकि रामायण, उत्तरकांड, सर्ग 16 (कैलाश-उत्थापन, नंदी का श्राप, 'रावण' नाम); शिव तांडव स्तोत्र को रावण की रचना मानना परंपरा
