The River in His Hair
आकाश से गरजती गंगा धरती को बहा ले जाने उतरती है और शिव उसे अपनी जटाओं में ऐसे समेट लेते हैं कि वह बरसों रास्ता ढूँढती रह जाती है; नीचे खड़ा राजा भगीरथ अपनी पीढ़ियों का अधूरा वचन लिए फिर से तप में बैठता है, क्योंकि सगर के साठ हज़ार पुत्रों की राख अब भी मुक्ति की राह देख रही है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
आकाश से गरजती गंगा धरती को बहा ले जाने उतरती है और शिव उसे अपनी जटाओं में ऐसे समेट लेते हैं कि वह बरसों रास्ता ढूँढती रह जाती है; नीचे खड़ा राजा भगीरथ अपनी पीढ़ियों का अधूरा वचन लिए फिर से तप में बैठता है, क्योंकि सगर के साठ हज़ार पुत्रों की राख अब भी मुक्ति की राह देख रही है।
Tradition & source notes
वाल्मीकि रामायण, बालकांड, सर्ग 38–44; भागवत पुराण, स्कंध 9, अध्याय 8–9
