ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Shiva & Shakti

Dice on Kailash

कैलाश पर एक खेल हुआ — और उस खेल में शिव अपना सब कुछ हार गए।

Original Hindi textDetailed story synopsis

दीवाली की अमावस की रात कैलाश पर पार्वती शिव से खेल की ज़िद करती हैं। चौसर बिछती है, गण इकट्ठा होते हैं, और नंदी को निर्णायक बनाया जाता है। खेल हँसी-मज़ाक़ से शुरू होता है — दाँव पर पहले चंद्रमा, फिर गले का सर्प, फिर त्रिशूल। पार्वती एक के बाद एक बाज़ी जीतती जाती हैं। एक निर्णायक बाज़ी पर विवाद होता है, और नंदी, जो अपने स्वामी से अलग सोच भी नहीं सकते, शिव के पक्ष में फ़ैसला दे देते हैं। पार्वती आहत होती हैं — खेल में नहीं, सच में। वे नंदी को श्राप देती हैं कि वे एक दुःसाध्य रोग से पीड़ित होंगे। कैलाश में सन्नाटा छा जाता है। शिव बीच में नहीं बोलते। नंदी रोते हुए क्षमा माँगते हैं। पार्वती का ग़ुस्सा धीरे-धीरे पिघलता है; वे श्राप से मुक्ति का रास्ता बताती हैं — तप और सच्चे मन की पूजा। नंदी तप करते हैं और स्वस्थ होते हैं। अगली सुबह, कार्तिक की प्रतिपदा को, पार्वती वरदान देती हैं: इस दिन जो प्रसन्न मन से खेलेगा, उसका साल सुख से बीतेगा। शिव-पार्वती में फिर हँसी लौट आती है।

A moment of reflection

घर में सबसे बड़े झगड़े बड़ी बातों पर नहीं, छोटी नाइंसाफ़ियों पर होते हैं। नंदी बुरे नहीं थे — उन्होंने बस प्रेम में सच से मुँह मोड़ लिया। यह कथा पूछती है: क्या अपनों का पक्ष लेना हमेशा सही है? पार्वती का ग़ुस्सा भी सच्चा है, और उनकी क्षमा भी। शिव का चुप रहना बताता है कि कभी-कभी बड़प्पन बीच में न पड़ने में है। दीवाली की रात घरों में आज भी ताश और चौसर खेली जाती है — यह कहानी उस परंपरा की जड़ है, और याद दिलाती है कि खेल में भी ईमानदारी ही असली जीत है।

Tradition & source notes

स्कंद पुराण की परंपरा (शिव-पार्वती द्यूत कथा, कार्तिक की अमावस और प्रतिपदा)

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