Shri Krishna

The Jewel of Blame

जंगल में एक मरा हुआ घोड़ा, एक मरा हुआ शेर, और ख़ून की लकीर एक अँधेरी गुफा तक जाती है; पीछे द्वारका में लोग फुसफुसा रहे हैं कि सूर्य की दी हुई स्यमंतक मणि के लिए कृष्ण ने ही प्रसेन को मारा, और अपने ऊपर लगा दाग़ धोने के लिए कृष्ण उस गुफा में उतरते हैं जहाँ अट्ठाईस दिन का युद्ध उनका इंतज़ार कर रहा है।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

जंगल में एक मरा हुआ घोड़ा, एक मरा हुआ शेर, और ख़ून की लकीर एक अँधेरी गुफा तक जाती है; पीछे द्वारका में लोग फुसफुसा रहे हैं कि सूर्य की दी हुई स्यमंतक मणि के लिए कृष्ण ने ही प्रसेन को मारा, और अपने ऊपर लगा दाग़ धोने के लिए कृष्ण उस गुफा में उतरते हैं जहाँ अट्ठाईस दिन का युद्ध उनका इंतज़ार कर रहा है।

Tradition & source notes

भागवत पुराण, दशम स्कंध, अध्याय 56–57; विष्णु पुराण, अंश 4, अध्याय 13 (स्यमंतक मणि, जाम्बवान से अट्ठाईस दिन का युद्ध, सत्राजित वध, शतधन्वा); भाद्रपद चतुर्थी के चाँद-दर्शन से कलंक का संबंध बाद की पुराण/लोक-परंपरा

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