The Horse Came Back Alone
आधी रात को कपिलवस्तु के महल से सारथी छन्न अपने राजकुमार सिद्धार्थ को घोड़े कंथक पर बिठाकर नगर से बाहर ले जाता है और सुबह खाली घोड़े, उतरे हुए गहनों और कटे केशों के साथ अकेला लौटता है, और उसी की आँखों से हम देखते हैं कि वह राजकुमार कैसे भूख, भय और मार के तूफ़ान से गुज़रकर बुद्ध बना।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
आधी रात को कपिलवस्तु के महल से सारथी छन्न अपने राजकुमार सिद्धार्थ को घोड़े कंथक पर बिठाकर नगर से बाहर ले जाता है और सुबह खाली घोड़े, उतरे हुए गहनों और कटे केशों के साथ अकेला लौटता है, और उसी की आँखों से हम देखते हैं कि वह राजकुमार कैसे भूख, भय और मार के तूफ़ान से गुज़रकर बुद्ध बना।
Tradition & source notes
बुद्धचरित (अश्वघोष), ललितविस्तर, पालि निदानकथा; कंथक के शोक से प्राण त्यागने का प्रसंग निदानकथा/परंपरा से