The Untied Tuft
धननंद की दान-सभा में एक कुरूप ब्राह्मण को सबके सामने आसन से घसीटकर निकाला जाता है, उसकी शिखा खुल जाती है और वह कसम खाता है कि नंद-वंश मिटाए बिना इसे नहीं बाँधेगा; फिर जंगल में 'राजा-राजा' खेलते एक लड़के में उसे अपना भविष्य दिखता है, पहली चढ़ाई बुरी तरह हारती है, और एक बुढ़िया की डाँट (गरम खिचड़ी बीच से नहीं, किनारे से खाते हैं) उसे जीत का रास्ता सिखाती है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
धननंद की दान-सभा में एक कुरूप ब्राह्मण को सबके सामने आसन से घसीटकर निकाला जाता है, उसकी शिखा खुल जाती है और वह कसम खाता है कि नंद-वंश मिटाए बिना इसे नहीं बाँधेगा; फिर जंगल में 'राजा-राजा' खेलते एक लड़के में उसे अपना भविष्य दिखता है, पहली चढ़ाई बुरी तरह हारती है, और एक बुढ़िया की डाँट (गरम खिचड़ी बीच से नहीं, किनारे से खाते हैं) उसे जीत का रास्ता सिखाती है।
Tradition & source notes
चाणक्य-चंद्रगुप्त परंपरा: विशाखदत्त का 'मुद्राराक्षस' (पृष्ठभूमि), महावंश-टीका (वंसत्थप्पकासिनी), हेमचंद्र का 'परिशिष्टपर्वन्'; नंद-सभा का अपमान और गरम खिचड़ी वाला प्रसंग कथा-परंपरा है, प्रमाणित इतिहास नहीं