A Night in the Freight Car
सितंबर 1893 की एक ठंडी रात, समिति का पता खो चुका, जेब खाली और अनजान शहर शिकागो में भटकता एक भगवाधारी भारतीय संन्यासी रेलवे यार्ड के एक खाली डिब्बे में सिकुड़कर सोता है, सुबह गलियों में दरवाज़े उसके मुँह पर बंद होते हैं, और कुछ ही दिन बाद वही आदमी हज़ारों की सभा में खड़ा होकर कहता है, 'अमरीका के बहनो और भाइयो'।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
सितंबर 1893 की एक ठंडी रात, समिति का पता खो चुका, जेब खाली और अनजान शहर शिकागो में भटकता एक भगवाधारी भारतीय संन्यासी रेलवे यार्ड के एक खाली डिब्बे में सिकुड़कर सोता है, सुबह गलियों में दरवाज़े उसके मुँह पर बंद होते हैं, और कुछ ही दिन बाद वही आदमी हज़ारों की सभा में खड़ा होकर कहता है, 'अमरीका के बहनो और भाइयो'।
Tradition & source notes
ऐतिहासिक: स्वामी विवेकानंद के पत्र (1893–94), मेरी लुईस बर्क की 'Swami Vivekananda in the West: New Discoveries', शिकागो विश्व धर्म महासभा (11 सितंबर 1893) के अभिलेख