Bhagavad Gita

What Were My Sons Doing?

युद्ध के दसवें दिन संजय हस्तिनापुर लौटकर अंधे राजा से कहता है कि पितामह भीष्म गिर गए हैं, और टूटा हुआ धृतराष्ट्र पूछता है कि शुरू से बताओ, मेरे बेटे और पांडु के बेटे क्या कर रहे थे; यह गीता की कथा महल के भीतर से है, एक ऐसे पिता की आँखों से जो सत्य सुनकर भी अपना 'मेरा' नहीं छोड़ पाता।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

युद्ध के दसवें दिन संजय हस्तिनापुर लौटकर अंधे राजा से कहता है कि पितामह भीष्म गिर गए हैं, और टूटा हुआ धृतराष्ट्र पूछता है कि शुरू से बताओ, मेरे बेटे और पांडु के बेटे क्या कर रहे थे; यह गीता की कथा महल के भीतर से है, एक ऐसे पिता की आँखों से जो सत्य सुनकर भी अपना 'मेरा' नहीं छोड़ पाता।

Tradition & source notes

महाभारत, भीष्म पर्व (भगवद्गीता उपपर्व, अध्याय 13–42): संजय का दसवें दिन लौटकर भीष्म के गिरने का समाचार देना और फिर आरंभ से युद्ध व गीता सुनाना; गीता 1.1 (मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय) और 18.74–78

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