Vedas & Upanishads

The Lump of Salt

बारह बरस गुरुकुल में वेद पढ़कर चौबीस साल का श्वेतकेतु अकड़ में घर लौटता है, और पिता उद्दालक बस एक प्रश्न पूछते हैं कि क्या तुमने वह सीखा जिससे अनसुना सुना हुआ और अनजाना जाना हुआ हो जाता है; यहीं से मिट्टी, बरगद के बीज, पंद्रह दिन के उपवास और पानी में घुली नमक की डली के सहारे एक पिता बेटे का घमंड धीरे-धीरे पिघलाता है।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

बारह बरस गुरुकुल में वेद पढ़कर चौबीस साल का श्वेतकेतु अकड़ में घर लौटता है, और पिता उद्दालक बस एक प्रश्न पूछते हैं कि क्या तुमने वह सीखा जिससे अनसुना सुना हुआ और अनजाना जाना हुआ हो जाता है; यहीं से मिट्टी, बरगद के बीज, पंद्रह दिन के उपवास और पानी में घुली नमक की डली के सहारे एक पिता बेटे का घमंड धीरे-धीरे पिघलाता है।

Tradition & source notes

छान्दोग्य उपनिषद, अध्याय 6 (उद्दालक आरुणि और श्वेतकेतु संवाद, 'तत् त्वमसि')

Back to stories
HomeDiya SevaPujasStoriesMy bookings