The Father Did Not Answer
हाईवे के एक पुराने ढाबे पर घर से भागा एक लड़का बूढ़े रसोइए से पूछता है कि ज़िंदगी आख़िर है क्या, और रसोइया उत्तर देने की जगह उसे आटा गूँधने बिठा देता है, ठीक वैसे ही जैसे वरुण ने बेटे भृगु को हर बार 'जाओ, तप करो' कहकर लौटा दिया था, और भृगु पाँच बार लौटकर अन्न से आनंद तक पहुँचा था।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
हाईवे के एक पुराने ढाबे पर घर से भागा एक लड़का बूढ़े रसोइए से पूछता है कि ज़िंदगी आख़िर है क्या, और रसोइया उत्तर देने की जगह उसे आटा गूँधने बिठा देता है, ठीक वैसे ही जैसे वरुण ने बेटे भृगु को हर बार 'जाओ, तप करो' कहकर लौटा दिया था, और भृगु पाँच बार लौटकर अन्न से आनंद तक पहुँचा था।
Tradition & source notes
तैत्तिरीय उपनिषद, भृगुवल्ली (वरुण और भृगु: अन्न, प्राण, मन, विज्ञान, आनंद); फ़्रेम कथा काल्पनिक
