ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Bhagavad Gita

The Day Father Forgot Me

जिस पिता ने उसे बचपन में गीता पढ़ाई थी, एक सुबह वही पिता बेटी से पूछते हैं कि आप कौन हैं; भूलने की बीमारी से घिरते उस घर में नाम, यादें और रिश्ते एक-एक कर गिरते जाते हैं, फिर भी पिता के होंठों पर श्लोक बचे रहते हैं, और बेटी को गीता का सबसे बड़ा सवाल फिर से जीना पड़ता है: मैं असल में हूँ कौन?

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

जिस पिता ने उसे बचपन में गीता पढ़ाई थी, एक सुबह वही पिता बेटी से पूछते हैं कि आप कौन हैं; भूलने की बीमारी से घिरते उस घर में नाम, यादें और रिश्ते एक-एक कर गिरते जाते हैं, फिर भी पिता के होंठों पर श्लोक बचे रहते हैं, और बेटी को गीता का सबसे बड़ा सवाल फिर से जीना पड़ता है: मैं असल में हूँ कौन?

Tradition & source notes

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2 (13, 16–25: आत्मा का स्वरूप), अध्याय 13 (1–2, 22: क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ), अध्याय 15 (7, 15); फ़्रेम कथा काल्पनिक

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