Midnight on the Bridge
दुकान डूब चुकी है, क़र्ज़दार दरवाज़े पर हैं और घरवालों को अब तक कुछ पता नहीं; आधी रात यमुना के पुल पर खड़े एक कपड़ा व्यापारी के बगल में रेलवे का एक रिटायर्ड गार्ड आकर रुकता है, जिसने ख़ुद एक बार सब कुछ खोया था, और सुबह होने तक एक-एक श्लोक के सहारे उसे घर लौटने की वजह देता है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
दुकान डूब चुकी है, क़र्ज़दार दरवाज़े पर हैं और घरवालों को अब तक कुछ पता नहीं; आधी रात यमुना के पुल पर खड़े एक कपड़ा व्यापारी के बगल में रेलवे का एक रिटायर्ड गार्ड आकर रुकता है, जिसने ख़ुद एक बार सब कुछ खोया था, और सुबह होने तक एक-एक श्लोक के सहारे उसे घर लौटने की वजह देता है।
Tradition & source notes
श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2 (3: क्लैब्यं मा स्म गमः; 14: मात्रास्पर्शास्तु; 38: सुखदुःखे समे कृत्वा; 40: स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य), अध्याय 6 (5–6: आत्मा ही अपना मित्र, आत्मा ही अपना शत्रु), अध्याय 18 (66: मा शुचः); फ़्रेम कथा काल्पनिक