The Minister's Signet Ring
नंद मिट चुके हैं, पर उनका वफ़ादार मंत्री राक्षस अब भी चंद्रगुप्त की जान के पीछे है; चाणक्य के हाथ राक्षस की अँगूठी लगती है और वह उसे मारने नहीं, जीतने की चाल चलता है, जिसका अंत सूली की ओर ले जाए जा रहे जौहरी चंदनदास पर होता है, जो दोस्त का परिवार सौंपने से इनकार कर चुका है।
This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.
नंद मिट चुके हैं, पर उनका वफ़ादार मंत्री राक्षस अब भी चंद्रगुप्त की जान के पीछे है; चाणक्य के हाथ राक्षस की अँगूठी लगती है और वह उसे मारने नहीं, जीतने की चाल चलता है, जिसका अंत सूली की ओर ले जाए जा रहे जौहरी चंदनदास पर होता है, जो दोस्त का परिवार सौंपने से इनकार कर चुका है।
Tradition & source notes
विशाखदत्त का संस्कृत नाटक 'मुद्राराक्षस' (सात अंक)
