Life lessons

Twelve and a Half Years of Silence

एक गाँव के बाहर ध्यान में खड़े मौन तपस्वी से गुस्साया ग्वाला अपने बैलों का हिसाब माँगता है और जवाब न मिलने पर उसके दोनों कानों में लकड़ी की कीलें ठोक देता है, और वह तपस्वी, जो कभी राजकुमार वर्धमान था, तब भी कुछ नहीं कहता; यहीं से खुलती है उसके साढ़े बारह बरस के मौन, विषधर चंडकौशिक और बंदिनी चंदनबाला की कथा।

Original Hindi textStory in preparation

This is an outline of the story. The full narrative is coming soon.

एक गाँव के बाहर ध्यान में खड़े मौन तपस्वी से गुस्साया ग्वाला अपने बैलों का हिसाब माँगता है और जवाब न मिलने पर उसके दोनों कानों में लकड़ी की कीलें ठोक देता है, और वह तपस्वी, जो कभी राजकुमार वर्धमान था, तब भी कुछ नहीं कहता; यहीं से खुलती है उसके साढ़े बारह बरस के मौन, विषधर चंडकौशिक और बंदिनी चंदनबाला की कथा।

Tradition & source notes

कल्पसूत्र (भद्रबाहु), आचारांग सूत्र, त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (हेमचंद्र); कानों में कीलें, चंडकौशिक और चंदनबाला के प्रसंग श्वेतांबर परंपरा से

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