When Arjuna Laid Down His Bow
Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.
Read the full story
Read devotional stories and discover a moment of reflection. No booking needed.
Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.
Read the full storyसड़क के एक झगड़े में एक नौजवान ने हाथ उठा दिया और सामने वाला अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ रहा है; थाने की उस लंबी रात में बूढ़ा हवलदार उसे गीता की वह सीढ़ी दिखाता है जो हाथ उठने से बहुत पहले एक छोटे-से विचार से उतरनी शुरू हुई थी: ध्यान, लगाव, चाह, क्रोध, मोह, भूल, बुद्धि का नाश और फिर विनाश।
View story outlineमहीनों से सो न पाया एक नौजवान आधी रात ऋषिकेश के घाट पर आ बैठता है, जहाँ दीये बेचने वाली एक बूढ़ी अम्मा तेज़ हवा में भी अपना दीया जलाए रखती है, और वही अम्मा उसे अर्जुन का वह सवाल सुनाती है जो आज हर किसी का है: यह मन तो हवा से भी चंचल है, इसे बाँधूँ कैसे?
View story outlineयुद्ध जीता जा चुका है, और कृष्ण के द्वारका लौटने से पहले की एक शाम अर्जुन संकोच से कहता है कि रणभूमि पर आपने जो कहा था वह सब मन से उतर गया, फिर से सुना दीजिए; कृष्ण की आँखों में पहली बार उदासी आती है, क्योंकि वह ज्ञान दोबारा वैसे नहीं कहा जा सकता।
View story outlineकाशी के मणिकर्णिका घाट पर एक बेटा माँ की अस्थियाँ लिए तीन दिन से गंगा में उतर नहीं पा रहा, और चालीस बरस से चिताएँ जलती देखता आया एक बूढ़ा नाविक हर रात उसे नाव पर बिठाकर गीता से वह बताता है जिसे आग भी नहीं जला सकती।
View story outlineयुद्ध के दसवें दिन संजय हस्तिनापुर लौटकर अंधे राजा से कहता है कि पितामह भीष्म गिर गए हैं, और टूटा हुआ धृतराष्ट्र पूछता है कि शुरू से बताओ, मेरे बेटे और पांडु के बेटे क्या कर रहे थे; यह गीता की कथा महल के भीतर से है, एक ऐसे पिता की आँखों से जो सत्य सुनकर भी अपना 'मेरा' नहीं छोड़ पाता।
View story outlineकस्बे की एक लड़की, जिसके नतीजे पर पूरे घर ने ज़मीन गिरवी रखकर दाँव लगाया है, नतीजे से पहले की रात छत पर बैठी काँप रही है, और उसके किसान दादा बुआई और बारिश के सहारे गीता का वह रहस्य खोलते हैं कि बीज बोना अपने हाथ में है, बादल नहीं।
View story outlineजिस पिता ने उसे बचपन में गीता पढ़ाई थी, एक सुबह वही पिता बेटी से पूछते हैं कि आप कौन हैं; भूलने की बीमारी से घिरते उस घर में नाम, यादें और रिश्ते एक-एक कर गिरते जाते हैं, फिर भी पिता के होंठों पर श्लोक बचे रहते हैं, और बेटी को गीता का सबसे बड़ा सवाल फिर से जीना पड़ता है: मैं असल में हूँ कौन?
View story outlineदुकान डूब चुकी है, क़र्ज़दार दरवाज़े पर हैं और घरवालों को अब तक कुछ पता नहीं; आधी रात यमुना के पुल पर खड़े एक कपड़ा व्यापारी के बगल में रेलवे का एक रिटायर्ड गार्ड आकर रुकता है, जिसने ख़ुद एक बार सब कुछ खोया था, और सुबह होने तक एक-एक श्लोक के सहारे उसे घर लौटने की वजह देता है।
View story outlineShowing 9 of 9 stories