Bhakti Stories · 140 stories

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48 chapters · Full textBhagavad Gita

When Arjuna Laid Down His Bow

Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.

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Story in preparationBhagavad Gita

Eight Steps Down

सड़क के एक झगड़े में एक नौजवान ने हाथ उठा दिया और सामने वाला अस्पताल में ज़िंदगी से लड़ रहा है; थाने की उस लंबी रात में बूढ़ा हवलदार उसे गीता की वह सीढ़ी दिखाता है जो हाथ उठने से बहुत पहले एक छोटे-से विचार से उतरनी शुरू हुई थी: ध्यान, लगाव, चाह, क्रोध, मोह, भूल, बुद्धि का नाश और फिर विनाश।

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Story in preparationBhagavad Gita

A Lamp Where No Wind Blows

महीनों से सो न पाया एक नौजवान आधी रात ऋषिकेश के घाट पर आ बैठता है, जहाँ दीये बेचने वाली एक बूढ़ी अम्मा तेज़ हवा में भी अपना दीया जलाए रखती है, और वही अम्मा उसे अर्जुन का वह सवाल सुनाती है जो आज हर किसी का है: यह मन तो हवा से भी चंचल है, इसे बाँधूँ कैसे?

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Story in preparationBhagavad Gita

When Arjuna Forgot

युद्ध जीता जा चुका है, और कृष्ण के द्वारका लौटने से पहले की एक शाम अर्जुन संकोच से कहता है कि रणभूमि पर आपने जो कहा था वह सब मन से उतर गया, फिर से सुना दीजिए; कृष्ण की आँखों में पहली बार उदासी आती है, क्योंकि वह ज्ञान दोबारा वैसे नहीं कहा जा सकता।

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Story in preparationBhagavad Gita

What the Fire Cannot Burn

काशी के मणिकर्णिका घाट पर एक बेटा माँ की अस्थियाँ लिए तीन दिन से गंगा में उतर नहीं पा रहा, और चालीस बरस से चिताएँ जलती देखता आया एक बूढ़ा नाविक हर रात उसे नाव पर बिठाकर गीता से वह बताता है जिसे आग भी नहीं जला सकती।

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Story in preparationBhagavad Gita

What Were My Sons Doing?

युद्ध के दसवें दिन संजय हस्तिनापुर लौटकर अंधे राजा से कहता है कि पितामह भीष्म गिर गए हैं, और टूटा हुआ धृतराष्ट्र पूछता है कि शुरू से बताओ, मेरे बेटे और पांडु के बेटे क्या कर रहे थे; यह गीता की कथा महल के भीतर से है, एक ऐसे पिता की आँखों से जो सत्य सुनकर भी अपना 'मेरा' नहीं छोड़ पाता।

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Story in preparationBhagavad Gita

The Night Before the Result

कस्बे की एक लड़की, जिसके नतीजे पर पूरे घर ने ज़मीन गिरवी रखकर दाँव लगाया है, नतीजे से पहले की रात छत पर बैठी काँप रही है, और उसके किसान दादा बुआई और बारिश के सहारे गीता का वह रहस्य खोलते हैं कि बीज बोना अपने हाथ में है, बादल नहीं।

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Story in preparationBhagavad Gita

The Day Father Forgot Me

जिस पिता ने उसे बचपन में गीता पढ़ाई थी, एक सुबह वही पिता बेटी से पूछते हैं कि आप कौन हैं; भूलने की बीमारी से घिरते उस घर में नाम, यादें और रिश्ते एक-एक कर गिरते जाते हैं, फिर भी पिता के होंठों पर श्लोक बचे रहते हैं, और बेटी को गीता का सबसे बड़ा सवाल फिर से जीना पड़ता है: मैं असल में हूँ कौन?

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Story in preparationBhagavad Gita

Midnight on the Bridge

दुकान डूब चुकी है, क़र्ज़दार दरवाज़े पर हैं और घरवालों को अब तक कुछ पता नहीं; आधी रात यमुना के पुल पर खड़े एक कपड़ा व्यापारी के बगल में रेलवे का एक रिटायर्ड गार्ड आकर रुकता है, जिसने ख़ुद एक बार सब कुछ खोया था, और सुबह होने तक एक-एक श्लोक के सहारे उसे घर लौटने की वजह देता है।

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