Bheem and the Demon Baka
इस नगर में हर घर की बारी आती है — राक्षस का भोजन बनने की। कल ब्राह्मण की बारी है।
Read the narrativeRead devotional stories and discover a moment of reflection. No booking needed.
इस नगर में हर घर की बारी आती है — राक्षस का भोजन बनने की। कल ब्राह्मण की बारी है।
Read the narrativeद्रौपदी ने भरी सभा से एक सवाल पूछा। बड़े-बड़े ज्ञानी थे वहाँ — किसी ने जवाब नहीं दिया।
Read the narrativeजिस बेटे को माँ ने नदी में बहाया था, युद्ध से पहले वह उसी के आगे आँचल फैलाए खड़ी थी।
Read the narrativeसोलह बरस के अभिमन्यु को व्यूह में घुसना आता था। बाहर निकलने का रास्ता उसने कभी सुना ही नहीं।
Read the narrativeजो भीम पेड़ उखाड़ता हुआ चलता था, वह रास्ते में लेटे एक बूढ़े बंदर की पूँछ तक न हिला सका।
Read the narrativeएक बरस छिपकर रहना था, पहचाने गए तो फिर वनवास। तभी सेनापति कीचक की नज़र सैरंध्री पर पड़ी।
Read the narrativeउसे पता था कि शादी के ठीक एक साल बाद उसका पति मरेगा। फिर भी उसने उसी को चुना।
Read the narrativeवारणावत में लाख से बना सुंदर महल आधी रात को धू-धू कर जल रहा है और भीम माँ और भाइयों को उठाए अँधेरी सुरंग से भाग रहे हैं; कहानी पीछे लौटती है विदुर की उस पहेली भरी चेतावनी तक जिसे सिर्फ़ युधिष्ठिर समझे, उस खनिक तक जो रोज़ चुपचाप खुदाई करता रहा, और उस निषाद माँ और उसके पाँच बेटों तक जो उस रात महल में ही सोए रह गए।
View story outlineयुद्ध के बाद गांधारी पट्टी बाँधे कुरुक्षेत्र में अपने सौ बेटों के शवों के बीच चल रही हैं और कृष्ण साथ हैं; यहीं से कहानी उस ब्याह के दिन तक लौटती है जब एक राजकुमारी ने तय किया कि जो पति नहीं देख सकता वह भी नहीं देखेगी, और दिखाती है कि यह त्याग पूरे परिवार के अंधेपन का हिस्सा कैसे बन गया।
View story outlineदुर्योधन के गिरने की रात, जंगल में बरगद के नीचे जागता अश्वत्थामा देखता है कि एक उल्लू पेड़ पर सोते कौवों को एक-एक कर मार रहा है, और उसी पल वह फ़ैसला कर लेता है जो पांडवों के सोते शिविर, द्रौपदी के पाँच बेटों और ख़ुद उसके माथे की मणि की क़ीमत पर ख़त्म होता है।
View story outlineगंगा किनारे मछुआरों के मुखिया के सामने युवराज देवव्रत पिता की ख़ुशी के लिए राजगद्दी और ब्याह दोनों त्याग देता है, आकाश से फूल बरसते हैं और 'भीष्म' नाम मिलता है, पर यही सौगंध अगले सौ बरस उसे हस्तिनापुर के सिंहासन से बाँधे रखती है, तब भी जब वह सिंहासन ग़लत रास्ते पर था।
View story outlineइंद्रकील पर्वत पर महीनों के कठोर तप के बाद एक जंगली सूअर अर्जुन पर झपटता है और ठीक उसी पल अर्जुन का तीर और एक अनजान किरात शिकारी का तीर उसे एक साथ भेदते हैं; 'शिकार मेरा है' की बहस से छिड़ी लड़ाई में अर्जुन के अक्षय तरकश के बाण ख़त्म हो जाते हैं, गांडीव छिन जाता है, और हारा हुआ अर्जुन मिट्टी के शिवलिंग पर जो माला चढ़ाता है, वह उसी शिकारी के गले में दिखाई देती है।
View story outlineShowing 12 of 21 stories
Show more stories