Radha-Krishna: The Flute That Never Played Again
Uddhava arrives with a message. Vrindavan teaches him another language of devotion.
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Uddhava arrives with a message. Vrindavan teaches him another language of devotion.
Read the full storyसात बच्चे उस कोठरी से गए, एक भी लौटकर नहीं आया। आठवें की रात ताले अपने आप खुलने लगे।
Read the narrativeयमुना का पानी पीते ही ग्वाल-बाल वहीं गिर पड़े। फिर कन्हैया कदंब की सबसे ऊँची डाल पर चढ़ गया।
Read the narrativeसात दिन, सात रातें, पत्थर जैसी बारिश — और पूरे गाँव की जान एक बच्चे की उँगली पर टिकी थी।
Read the narrativeवो दोस्त से कुछ माँगने गया था। कुछ माँग न सका — और लौटा तो अपना घर पहचान नहीं पाया।
Read the narrativeनौकरी छूटने के बाद गाँव लौटा एक बेटा अपनी बीमार माँ की सेवा करता है, जो हर रात उसे अवधूत के चौबीस गुरुओं में से एक की कहानी सुनाती हैं, वैसे ही जैसे द्वारका छोड़ने से पहले कृष्ण ने उद्धव को सिखाया था कि उनके जाने के बाद कैसे जिया जाए, और हर गुरु बेटे की उलझन की एक गाँठ खोलता है, जबकि माँ की साँसें धीरे-धीरे कम हो रही हैं।
View story outlineदही का मटका टूटा पड़ा है, नन्हा कान्हा ओखली पर चढ़कर बंदरों को माखन बाँट रहा है, और यशोदा रस्सी लिए पीछे आती हैं, पर गोकुल की हर रस्सी जोड़ने के बाद भी वह हर बार ठीक दो उँगल छोटी रह जाती है, जबकि आँगन के दो पुराने अर्जुन पेड़ों में बरसों से कोई इंतज़ार कर रहा है।
View story outlineयमुना किनारे दोपहर के भोजन के बीच सारे बछड़े और फिर सारे ग्वाल-बाल पलक झपकते ग़ायब हो जाते हैं, ब्रह्मा उन्हें छिपा ले गए हैं, और कृष्ण चुपचाप ख़ुद हर बछड़ा, हर बालक बनकर पूरा एक साल व्रज लौटते हैं; किसी माँ को पता नहीं चलता, बस हर माँ का प्यार पहले से गहरा हो जाता है, और सिर्फ़ बलराम को कुछ खटकने लगता है।
View story outlineजंगल में एक मरा हुआ घोड़ा, एक मरा हुआ शेर, और ख़ून की लकीर एक अँधेरी गुफा तक जाती है; पीछे द्वारका में लोग फुसफुसा रहे हैं कि सूर्य की दी हुई स्यमंतक मणि के लिए कृष्ण ने ही प्रसेन को मारा, और अपने ऊपर लगा दाग़ धोने के लिए कृष्ण उस गुफा में उतरते हैं जहाँ अट्ठाईस दिन का युद्ध उनका इंतज़ार कर रहा है।
View story outlineमथुरा की राजसभा में आधी रात को धनुष टूटने की ख़बर आती है और कंस फिर जाग उठता है; ग्यारह बरस से वह हर रात एक ही चेहरे से डरता आया है, पूतना से केशी तक हर भेजा हुआ लौटा नहीं, और अब उसने अपने ही भरोसेमंद अक्रूर को उस बालक को मौत के न्योते पर लाने भेजा है।
View story outlineकुरुक्षेत्र के छत्तीस बरस बाद यदु-कुमार साम्ब को गर्भवती स्त्री बनाकर ऋषियों से मज़ाक करते हैं और श्राप मिलता है कि वह एक लोहे का मूसल जनेगा जो पूरे कुल का नाश करेगा; कृष्ण के सारथी दारुक की आँखों से हम देखते हैं कि जो नगर कभी कोई युद्ध नहीं हारा, वह कैसे अपने ही हाथों गिरता है, और गांधारी का बरसों पुराना श्राप चुपचाप पूरा होता है।
View story outlineमथुरा पर फिर घेरा पड़ने वाला है, सामने कालयवन की अजेय सेना है, और कृष्ण वह करते हैं जो कोई वीर नहीं करता, पीठ फेरकर भागते हैं, और दुनिया उन्हें 'रणछोड़' कहकर हँसती है; बरसों बाद वही कृष्ण ब्राह्मण के वेश में भीम और अर्जुन के साथ जरासंध के नगर में चुपचाप प्रवेश करते हैं, जहाँ बंदी राजा मौत का इंतज़ार कर रहे हैं।
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