Bhakti Stories · 140 stories

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All stories 140Shri Krishna 13Bhagavad Gita 9Puranic stories 26Ramayana 17Mahabharata traditions 21Shiva & Shakti 15Vedas & Upanishads 9Wisdom 12Saints & Dohas 10Life lessons 8
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A Pyre in the Courtyard

कालडी की पूर्णा नदी में नहाते आठ बरस के शंकर का पैर मगरमच्छ पकड़ लेता है और वह किनारे खड़ी माँ से कहता है कि संन्यास की अनुमति दो तो यह मुझे छोड़ देगा; माँ हाँ कहती हैं और बदले में एक वचन लेती हैं, और बरसों बाद वही संन्यासी वह वचन निभाने लौटता है और जब पूरा गाँव साथ देने से मना कर देता है तो माँ की चिता अपने ही आँगन में अकेले जलाता है।

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The Boy Bent in Eight Places

राजा जनक की शास्त्रार्थ सभा में आठ जगह से टेढ़ा बारह बरस का एक बालक लड़खड़ाता हुआ घुसता है, पूरी सभा उस पर हँस पड़ती है, और वह पलटकर हँसता है, क्योंकि यही वह सभा है जहाँ बंदी से हारकर उसके पिता को पानी में डुबो दिया गया था, और आज वह उसी बंदी को ललकारने आया है।

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Fifty-Eight Nights

युद्ध जीतकर भी युधिष्ठिर अपने ही भाइयों और गुरुओं के ख़ून के बोझ तले राजपाट छोड़कर वन जाने की ज़िद पर हैं, तब कृष्ण उन्हें कुरुक्षेत्र ले जाते हैं जहाँ बाणों की शय्या पर लेटे भीष्म, जिन्हें युधिष्ठिर ने ही गिरवाया था, उत्तरायण तक हर रात एक सीख और एक कथा से उनके अपराध-बोध को तोड़ते हैं।

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The Boy Who Died One Afternoon

1896 की एक दोपहर मदुरै में सोलह बरस का स्कूली लड़का वेंकटरमण अचानक मौत के डर से घिर जाता है, फ़र्श पर लाश की तरह लेटकर साँस रोक लेता है और ख़ुद से पूछता है कि अगर यह शरीर मर गया तो मरा कौन; कुछ हफ़्ते बाद वह एक पर्ची छोड़कर घर से निकल जाता है कि मैं अपने पिता की खोज में जा रहा हूँ, और अरुणाचल की गुफाओं में बरसों मौन बैठा वही लड़का दुनिया को एक ही सवाल देता है: मैं कौन हूँ?

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The Horse Came Back Alone

आधी रात को कपिलवस्तु के महल से सारथी छन्न अपने राजकुमार सिद्धार्थ को घोड़े कंथक पर बिठाकर नगर से बाहर ले जाता है और सुबह खाली घोड़े, उतरे हुए गहनों और कटे केशों के साथ अकेला लौटता है, और उसी की आँखों से हम देखते हैं कि वह राजकुमार कैसे भूख, भय और मार के तूफ़ान से गुज़रकर बुद्ध बना।

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A Night in the Freight Car

सितंबर 1893 की एक ठंडी रात, समिति का पता खो चुका, जेब खाली और अनजान शहर शिकागो में भटकता एक भगवाधारी भारतीय संन्यासी रेलवे यार्ड के एक खाली डिब्बे में सिकुड़कर सोता है, सुबह गलियों में दरवाज़े उसके मुँह पर बंद होते हैं, और कुछ ही दिन बाद वही आदमी हज़ारों की सभा में खड़ा होकर कहता है, 'अमरीका के बहनो और भाइयो'।

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Twelve and a Half Years of Silence

एक गाँव के बाहर ध्यान में खड़े मौन तपस्वी से गुस्साया ग्वाला अपने बैलों का हिसाब माँगता है और जवाब न मिलने पर उसके दोनों कानों में लकड़ी की कीलें ठोक देता है, और वह तपस्वी, जो कभी राजकुमार वर्धमान था, तब भी कुछ नहीं कहता; यहीं से खुलती है उसके साढ़े बारह बरस के मौन, विषधर चंडकौशिक और बंदिनी चंदनबाला की कथा।

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He Had Everything, Yet

अयोध्या के घाट पर आधी रात, सब कुछ पा लेने के बाद भी भीतर से खाली हो चुका एक नौजवान नदी में उतरने ही वाला है कि एक बूढ़ा पुजारी उसे रोककर उस सोलह बरस के राजकुमार राम की कथा सुनाता है जिसने तीर्थ से लौटकर खाना-पीना छोड़ दिया था और भरी सभा में पूछा था कि जीने का अर्थ क्या है, और कैसे गुरु वसिष्ठ ने उसे उत्तर दिए।

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