Radha-Krishna: The Flute That Never Played Again
Uddhava arrives with a message. Vrindavan teaches him another language of devotion.
महारानी का सवाल
द्वारका का महल, बगीचा · बरसों बाद, संध्या
सूत्रधार: और समुद्र के बीच द्वारका बस गई। सोने के महल, चौड़ी सड़कें, लहरों की आवाज़। बरस बीते। विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी कृष्ण की पटरानी बनकर आईं।
रुक्मिणी: उद्धव जी, एक बात पूछूँ? आप उनके सबसे पुराने सखा हैं।
उद्धव: पूछिए, महारानी।
रुक्मिणी: सुना है, वह बाँसुरी बजाते थे। ऐसी कि गायें घास चरना भूल जाती थीं। पर इतने बरसों में मैंने एक बार नहीं सुनी। महल में कहीं बाँसुरी दिखती भी नहीं।
उद्धव: महारानी... यह बात आप उन्हीं से पूछें तो अच्छा।
रुक्मिणी: आप जानते हैं। आपकी आँखें बता रही हैं।
उद्धव: थोड़ा-बहुत जानता हूँ। बहुत पहले मैं ब्रज गया था। पर वह कहानी मेरी नहीं है, महारानी। मैं कहूँगा, तो अधूरी कहूँगा।
रुक्मिणी: वह कभी-कभी साँझ को छत पर अकेले खड़े रहते हैं। उत्तर की ओर देखते हुए। मैंने सोचा, मथुरा याद आती होगी।
उद्धव: मथुरा से भी आगे, महारानी।
रुक्मिणी: मथुरा से आगे... वृंदावन?
उद्धव: मैंने कुछ नहीं कहा, महारानी।
रुक्मिणी: नहीं कहा। ठीक है। तो फिर आज मैं उन्हीं से पूछूँगी। छत पर। जब वह उत्तर की ओर देख रहे हों।
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Tradition & source notes
ब्रह्मवैवर्त पुराण (श्रीकृष्णजन्म खंड — उद्धव-राधा प्रसंग), गर्ग संहिता, गीत गोविंद व ब्रज की भक्ति परंपरा; अक्रूर-आगमन भागवत 10.39, उद्धव-प्रसंग व भ्रमर-गीत भागवत 10.46–47, कुरुक्षेत्र-मिलन भागवत 10.82 से (भागवत में राधा का नाम नहीं आता)। बाँसुरी राधा को सौंपना और कृष्ण का फिर बाँसुरी न बजाना ब्रज की लोक-परंपरा है, ग्रंथ-वचन नहीं।
