When Arjuna Laid Down His Bow
Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.
किसान का बीज
कुरुक्षेत्र · अर्जुन का रथ
श्रीकृष्ण: कुछ न करना भी एक फ़ैसला है, पार्थ। और अक्सर सबसे डरा हुआ फ़ैसला।
अर्जुन: तो मैं क्या करूँ? फल भूल जाऊँ, और फिर भी लड़ूँ?
श्रीकृष्ण: किसान को देखो। वह खेत जोतता है, बीज बोता है, पानी देता है। बारिश उसके हाथ में नहीं। पर इसलिए वह बोना नहीं छोड़ता।
अर्जुन: और अगर बारिश न आई?
श्रीकृष्ण: तो अगले बरस फिर बोएगा। बिना डरे, बिना हारे। सफलता हो या असफलता, मन को एक-सा रखना, यही योग है। और काम को पूरे मन और हुनर से करना, यह भी योग है।
अर्जुन: सुनने में आसान है, केशव। पर ऐसा आदमी होता कैसा है? जिसकी बुद्धि सच में टिक गई हो... वह कैसे बोलता है? कैसे बैठता है? कैसे चलता है?
हस्तिनापुर का महल · दसवीं रात
धृतराष्ट्र: रुको, संजय।
संजय: जी, महाराज?
धृतराष्ट्र: इसका जवाब बाद में सुनाना। जब अर्जुन रथ में बैठा सवाल पर सवाल पूछ रहा था, और सारी सेनाएँ खड़ी थीं... उस घड़ी मेरा दुर्योधन क्या कर रहा था?
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Tradition & source notes
श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 1–18), महाभारत, भीष्म पर्व (संजय को दिव्य दृष्टि, भीष्म का पतन, युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना)