When Arjuna Laid Down His Bow
Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.
मिथिला जल रही है
कुरुक्षेत्र · अर्जुन का रथ
अर्जुन: राजा जनक? जिन्हें बड़े-बड़े ऋषि भी गुरु मानते थे?
श्रीकृष्ण: वही। जनक जैसे लोगों ने कर्म करते हुए ही वह पाया, जो ऋषि जंगलों में ढूँढते हैं। राज छोड़ा नहीं। सिंहासन पर बैठे-बैठे मोह छोड़ दिया।
अर्जुन: यह कैसे हो सकता है?
श्रीकृष्ण: कहते हैं, एक बार उनकी नगरी मिथिला में आग लगी। सब भागे। और जनक ने कहा... मिथिला जल रही है, पर मेरा कुछ नहीं जल रहा।
अर्जुन: तो क्या उन्हें अपनी प्रजा की परवाह नहीं थी?
श्रीकृष्ण: परवाह थी। काम भी पूरा किया। बस आग उनके भीतर नहीं लगी।
श्रीकृष्ण: और एक बात याद रखो, पार्थ। बड़े लोग जो करते हैं, दुनिया वही करती है। वे जो रास्ता बनाते हैं, लोग उसी पर चलते हैं।
हस्तिनापुर का महल · दसवीं रात
धृतराष्ट्र: बड़े जो करते हैं... दुनिया वही करती है...
संजय: महाराज?
धृतराष्ट्र: जुए की उस सभा में, संजय... बहू को घसीटा गया, और मैं बस पूछता रहा, क्या जीता? क्या जीता?
संजय: महाराज...
धृतराष्ट्र: और मेरे बेटों ने... बस वही सीखा, जो उन्होंने अपने पिता को करते—
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Tradition & source notes
श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 1–18), महाभारत, भीष्म पर्व (संजय को दिव्य दृष्टि, भीष्म का पतन, युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना)