ॐBhakti Aanganभक्ति आंगन
Bhagavad Gita

When Arjuna Laid Down His Bow

Between duty and attachment, Arjuna pauses. Krishna’s conversation begins.

Original Hindi text48 chapters
44 / 48
Chapter 44

निहत्थे युधिष्ठिर

पांडव सेना का अगला मोर्चा · पहले दिन की सुबह

अर्जुन: भैया! आप कहाँ जा रहे हैं? सामने शत्रु की सेना है! आपका कवच...

संजय: युधिष्ठिर ने कोई जवाब नहीं दिया, महाराज। हाथ जोड़े, चुपचाप चलते रहे। चारों भाई घबराकर पीछे-पीछे दौड़े। कृष्ण भी।

श्रीकृष्ण: मैं जानता हूँ ये कहाँ जा रहे हैं, पार्थ। बड़ों से आज्ञा और आशीर्वाद लिए बिना उनसे लड़ना, इन्हें ठीक नहीं लगता। ये पितामह, गुरु द्रोण और बाक़ी बड़ों के पास जा रहे हैं।

अर्जुन: पर केशव, अगर किसी ने बाण चला दिया तो?

श्रीकृष्ण: तो सारी दुनिया देखेगी कि किसने निहत्थे पर बाण चलाया। चलो, पीछे रहो।

कौरव सेना का अगला मोर्चा · पहले दिन की सुबह

दुर्योधन: धर्मराज कवच उतारकर आ रहे हैं, पितामह। लगता है, संधि की भीख माँगने आए हैं।

भीष्म पितामह: डरा हुआ आदमी कवच नहीं उतारता, दुर्योधन।

हस्तिनापुर का महल · दसवीं रात

धृतराष्ट्र: निहत्था? मेरी सेना के बीच? कोई भी एक बाण...

संजय: कोई बाण नहीं चला, महाराज। सारी सेना देखती रह गई। वे सीधे पितामह के रथ तक गए।

कौरव सेना · भीष्म का रथ

युधिष्ठिर: पितामह... प्रणाम। आपसे लड़ना है। इसलिए पहले आपकी आज्ञा, और आपका आशीर्वाद माँगने आया हूँ।

All chapters (48)
1. पितामह गिर गए2. व्यास जी की आँखें3. दुर्योधन की गिनती4. शंखों का जवाब5. रथ बीच में6. सामने कौन खड़ा था7. गांडीव गिर गया8. लोभ की पट्टी9. धनुष रख दिया10. सारथी मुड़े11. भीख माँगकर जीना12. मैं आपका शिष्य हूँ13. जो कभी नहीं मरता14. पुराने कपड़े15. पिता का सवाल16. कर्म पर हक़17. किसान का बीज18. कछुए की तरह19. सीढ़ी जो नीचे जाती है20. अर्जुन की उलझन21. एक पल भी नहीं22. मिथिला जल रही है23. मुझे कुछ नहीं चाहिए24. धुएँ में ढकी आग25. युग-युग में26. ज्ञान की तलवार27. मन हवा जैसा28. जो बीच में गिर जाए29. पानी का स्वाद30. एक पत्ता, एक फूल31. एक छोटा-सा हिस्सा32. हज़ार सूरज33. काँपते लोक34. मैं काल हूँ35. बस निमित्त बनो36. हे सखा37. सखा लौट आए38. एक संदेश39. जो मुझे प्यारा है40. तीन रस्सियाँ41. जैसा चाहो, वैसा करो42. मेरी शरण आओ43. मोह मिट गया44. निहत्थे युधिष्ठिर45. पितामह का आशीर्वाद46. गुरु का वचन47. कोई आएगा?48. जहाँ कृष्ण, वहीं विजय
Tradition & source notes

श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 1–18), महाभारत, भीष्म पर्व (संजय को दिव्य दृष्टि, भीष्म का पतन, युधिष्ठिर का आशीर्वाद लेना)

Back to stories
HomeDiya SevaPujasStoriesMy bookings